- सम्राट हैवेन्स की नीलामी की सूचना जारी
- एनसीएलटी ने 44.74 करोड़ तय की है नीलामी राशि
- मेरठ का प्रतिष्ठित व प्रीमियम मैरिज वेन्यू रहा है यह होटल
- 2012 में प्रमोटर्स ने लिया था 6.62 करोड़ का लोन
- प्रमोटर्स की अन्य संपत्तियां भी आई नीलामी के दायरे में
- राकेश कुमार गुप्ता, निशांत गुप्ता आदि हैं होटल के प्रमोटर्स
- “As is where is” और “Whatever there is” आधार पर नीलामी
तीस साल की विरासत के साथ मेरठ की शान रहा होटल सम्राट हैवेन्स बिकने को है। साल 2015-16 तक यह होटल मेरठ के गढ़ रोड क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित और प्रीमियम मैरिज वेन्यू व होटलों में गिना जाता था लेकिन अब हालात पूरी तरह से बदल गये हैं। रिनोवेशन व अन्य मद के लिये 2012 में प्रमोटर्स ने पंजाब नेशनल बैंक से 6.62 करोड़ रुपये का टर्म लोन लिया था। जिसे बाद में दस करोड़ कर दिया गया। किस्तों का भुगतान न करने पर अब एनसीएलटी की तमाम औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद नीलामी की सूचना जारी कर दी गई है। इसमें होटल की इस विशाल संपत्ति की कीमत ₹44.74 करोड़ तय की गई है।
आपको बता दें कि होटल सम्राट हैवेन्स का निर्माण और संचालन करने वाली मूल कंपनी ‘गुप्ता मैरिज हॉल्स प्राइवेट लिमिटेड’ का पंजीकरण 23 फरवरी 1996 को हुआ था। कंपनी के गठन के कुछ समय बाद ही इस थ्री-स्टार होटल और बैंक्वेट हॉल की इमारत का निर्माण पूरा कर इसे शुरू किया गया था। यह होटल लगभग 4,465 वर्ग मीटर (लगभग 1.1 एकड़) की विशाल व्यावसायिक भूमि पर फैला हुआ है।होटल की मुख्य इमारत बहुमंजिला (जी+3 यानी ग्राउंड फ्लोर के साथ तीन मंजिलें) है, जिसका कुल कवर्ड एरिया लगभग 64,000 वर्ग फीट से अधिक है। इसमें कुल 45 से अधिक लग्जरी और डीलक्स कमरे हैं। शादी और बड़े आयोजनों के लिए इसमें 3 विशाल इनडोर बैंक्वेट हॉल्स हैं। इसमें एक मल्टी-कजीन रेस्तरां (Restaurant), बार स्पेस, कॉन्फ्रेंस रूम और लगभग 100 से अधिक वाहनों के लिए सुरक्षित इनडोर पार्किंग स्पेस है।
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हुआ यह कि होटल को आधुनिक और व्यवसाय के विस्तार के लिए प्रमोटर्स ने साल 2012 में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से ₹6.62 करोड़ का मुख्य टर्म लोन लिया था, जिसे साल 2014 में बढ़ाकर ₹10 करोड़ से अधिक कर दिया गया। लोन की किस्त न चुका पाने के कारण बैंक ने 29 जुलाई 2016 को इस होटल के खाते को एनपीए घोषित कर दिया और दिसंबर 2016 में संपत्ति को कब्जे में लेने का पहला नोटिस जारी किया। दरअसल, पंजाब नेशनल बैंक ने वित्तीय बकाए की रिकवरी के लिए इस ग्रुप के खिलाफ इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के सेक्शन सात के तहत याचिका दायर की थी। NCLT की दिल्ली बेंच ने इसे स्वीकार करते हुए कंपनी के खिलाफ कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस यानी CIRP शुरू करने का आदेश दे दिया। जब तय समय सीमा के भीतर कंपनी को पुनर्जीवित करने का कोई ठोस रेजोल्यूशन प्लान नहीं मिला, तो कर्जदाताओं की समिति (CoC) की सिफारिश पर NCLT ने कंपनी के लिक्विडेशन यानी संपत्तियों को बेचकर कर्ज चुकाने का आदेश जारी कर दिया। इसके लिए आधिकारिक तौर पर नीतिन नारंग को लिक्विडेटर नियुक्ति कर दिया। लिक्विडेटर ने होटल सम्राट हैवेन्स की संपत्तियों और दस्तावेजों का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में लेने के लिए NCLT और NCLAT (अपीलीय न्यायाधिकरण) में कानूनी कदम उठाए हैं, ताकि इसके जरिए बैंक के बकाए की वसूली की जा सके।
वहीं ‘गुप्ता मैरिज हॉल्स प्राइवेट लिमिटेड’ और ‘होटल सम्राट हैवेन्स’ के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में दिवालियापन (Insolvency/Liquidation) की कानूनी प्रक्रिया जारी है। बैंक और लिक्विडेटर द्वारा समय-समय पर ग्रुप से जुड़ी संपत्तियों की E-Auction के लिए Public Notice जारी किए जा चुके हैं। इस ग्रुप के प्रमोटर्स जैसे राकेश कुमार गुप्ता, निशांत गुप्ता आदि और उनसे जुड़ी सहयोगी कंपनियों (Richmondd Infratech, Samrat Heavens Infra Developers) की दिल्ली जैसे पीतमपुरा स्थित पुष्पांजलि एन्क्लेव की 10.73 करोड़ की प्रॉपर्टी व अन्य संपत्तियों को रिज़र्व प्राइस तय कर नीलामी पर चढ़ाया जा चुका है।
अब यहां एक कानूनी पेच भी सामने आया। दरअसल, जांच में सामने आया कि होटल सम्राट हैवेन्स की ज़मीन और बिल्डिंग सीधे कंपनी के नहीं बल्कि प्रमोटर्स के व्यक्तिगत नाम पर थी। NCLT ने स्पष्ट किया कि दिवालिया प्रक्रिया के तहत केवल कंपनी की संपत्ति बेची जा सकती है, प्रमोटर की निजी ज़मीन नहीं। यहां सवाल तो बनता है कि फिर बैंक इसे क्यों बेच रहा है। तो जवाब यह है कि भले ही ज़मीन कंपनी की नहीं थी, लेकिन प्रमोटर्स ने उस निजी ज़मीन को बैंक से लोन लेते समय ‘गारंटर’ के तौर पर बंधक यानी Mortgage रखा था। इसलिए बैंक अब कंपनी कानून (NCLT) के बजाय सीधे सरफेसी एक्ट का सहारा ले रहा है। यह कानून बैंकों और वित्तीय संस्थानों को बिना अदालत के हस्तक्षेप के डिफॉल्टरों की गिरवी रखी हुई संपत्ति को जब्त करने और नीलाम करने का अधिकार देता है। इसके तहत ही उस ज़मीन और होटल को नीलाम किया जा रहा है। बैंक द्वारा की जाने वाली यह नीलामी “As is where is” यानी जहाँ है, जैसा है और “Whatever there is” यानी जो कुछ भी है के आधार पर होती है। इसका मतलब है कि खरीद के बाद पुराने प्रमोटर्स का ज़मीन या होटल पर कोई कानूनी अधिकार नहीं रह जाएगा।