- धामों की व्यवस्था में सुधार के नाम पर त्रिवेंद्र सरकार ने बनाया था बोर्ड
- पुरोहितों ने इसे अपने अधिकार पर कुठाराघात बताया था
- हरीश रावत सरकार बनने पर इसे भंग करने की कर चुके घोषणा
- धामी सरकार पर चौतरफा दबाव बना हुआ था
पुरोहितों के भारी दबाव व विरोध के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के भंग कर दिया है। हरीश रावत पहले ही यह घोषणा कर धामी सरकार पर दबाव बनाने का अपना काम यह कहते हुए कर चुके हैं कि कांग्रेस की सरकार आने पर बोर्ड को भंग कर दिया जायेगा। इसके बाद आज प्रदेश के मुख्यमंत्री धामी ने स्वयं देवस्थानम बोर्ड को भंग करते हुए इसकी जानकारी साझा की। सीएम धामी ने कहा कि हमारी सरकार ने चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड विधेयक को वापस लेने का निर्णय लिया है।
दरअसल, देवस्थानम बोर्ड एक्ट मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार में बना था। इसके पीछे तर्क था कि बोर्ड के गठन व इसके अधीन पवित्र धाम आने से व्यवस्था में और अधिक सुधार हो पायेगा। उधर, पुरोहितों ने इसका यह कहते हुए विरोध किया है कि ऐसा होने से उनके परंपरागत अधिकार को खत्म किया गया है। हाल ही में पीएम मोदी के केदारनाथ दौरे के दौरान भी पुरोहितों ने इसका कड़ा विरोध किया था। इस पर सीएम धामी को वहां पुरोहितों को मनाने के लिये भेजा गया था। आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह ट्वीट कर जानकारी साझा की।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड के चार धाम के पुरोहितों की संस्था ने भी कहा था कि चुनाव में वो 15 उम्मीदवार खड़ा करेगी। ये पुरोहित राज्य सरकार की ओर से बनाए गए देवस्थानम बोर्ड का विरोध कर रहे थे। इसके लिए पुरोहितों ने चार धाम तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत समिति का गठन किया। समिति ने कहा कि वह भाजपा के खिलाफ प्रचार करेगी।
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