दलित महापंचायत के दौरान आला अफसरों संग दिखे निलंबित इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़
मेरठ

दलित महापंचायत के दौरान आला अफसरों संग दिखे निलंबित इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़

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मेरठ: मेरठ के बहुचर्चित थर्ड डिग्री और बर्बरता कांड में निलंबित चल रहे इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ को रविवार को दलित महापंचायत के दौरान कमिश्नरी चौराहे पर सरेआम देखे जाने से एक नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कस्टडी में प्रताड़ना के गंभीर आरोपों में सस्पेंड चल रहे अधिकारी का इस संवेदनशील माहौल में पुलिस के आला अफसरों के साथ खड़े होना और बातचीत करना प्रदर्शनकारियों को नागवार गुजरा है, जिससे आंदोलनकारियों का गुस्सा एक बार फिर भड़क उठा है।

ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर मेरठ के कमिश्नरी पार्क और चौराहे पर रविवार को दलित महापंचायत का आयोजन किया गया था। इस संवेदनशील माहौल में सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रदर्शनकारियों की नजर सस्पेंडेड इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ पर पड़ी। वे चौराहे पर तैनात पुलिस अधिकारियों के साथ बेहद सामान्य रूप से बातचीत करते दिखाई दिए। जैसे ही आंदोलनकारियों ने उन्हें देखा, कमिश्नरी चौराहे पर तीखा विरोध और नाराजगी शुरू हो गई। आंदोलनकारियों का आरोप है कि जिस अधिकारी पर खुद गंभीर आपराधिक कृत्य और नेताओं को प्रताड़ित करने के आरोप हैं, वह पुलिस महकमे के संरक्षण में सरेआम वीआईपी ट्रीटमेंट के साथ घूम रहा है।

आंदोलनकारियों और पीड़ित किसान नेताओं का कहना है कि सिर्फ लाइन हाजिर या निलंबन का ढोंग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पीड़ित पक्ष ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक आरोपी इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ और तत्कालीन एसएसपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल नहीं भेजा जाता, तब तक आंदोलन थमेगा नहीं। इसी मांग को लेकर आगामी 10 सितंबर को मेरठ में एक और विशाल दलित-गुर्जर महापंचायत बुलाने का भी ऐलान किया जा चुका है।