RBI की मॉनिटरी पॉलिसी की बड़ी बातें, रियल जीडीपी और महंगाई का अनुमान दे रहा अच्छे संकेत ।।
BREAKING बिजनेस​

RBI की मॉनिटरी पॉलिसी की बड़ी बातें, रियल जीडीपी और महंगाई का अनुमान दे रहा अच्छे संकेत ।।

Feb 8, 2024
13 Views

भारतीय रिजर्व बैंक ने आज अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समिति के फैसलों का एलान कर दिया है और इसमें नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. आरबीआई की 6 सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति में से 5 सदस्यों ने बहुमत से रेपो रेट और एमएसएफ, बैंक रेट की दरों में कोई बदलाव नहीं करने के पक्ष में वोट किया है. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की मीटिंग के मिनट्स का एलान करते हुए देश की रियल जीडीपी को लेकर अच्छा अनुमान दिया है. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है, ये लगातार ग्रोथ के रास्ते पर आत्मविश्वास से भरी प्रगति कर रही है । आरबीआई गवर्नर ने लगातार छठी बार नीतिगत दर रेपो को 6.5 फीसदी पर बरकरार रखा है. रेपो दर को 6.5 फीसदी पर बरकरार रखने का मतलब है कि होम लोन, कार लोन समेत विभिन्न लोन पर ईएमआई में कोई बदलाव नहीं होगा । चालू वित्त वर्ष के लिए यानी साल 2023-24 के लिए रियल जीडीपी 7.3 फीसदी पर रहने का अनुमान है. अगले वित्त वर्ष यानी साल 2024-25 के लिए रियल जीडीपी दर का अनुमान सात फीसदी रखा है. अगले वित्त वर्ष की चार तिमाहियों के लिए रियल जीडीपी का अनुमान ये है :

2024-25 की पहली तिमाही- 7.2 फीसदी
2024-25 की दूसरी तिमाही- 6.8 फीसदी
2024-25 की पहली तिमाही- 7 फीसदी
2024-25 की पहली तिमाही- 6.9 फीसदी

इसके साथ ही आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष में रिटेल महंगाई दर के 5.4 फीसदी पर रहने का अनुमान दिया है. अगले वित्त वर्ष यानी साल 2024-25 के लिए सीपीआई या रिटेल महंगाई दर के 4.5 फीसदी रहने का अनुमान है. अगली चार तिमाहियों के लिए रिटेल महंगाई दर का अनुमान जानें :

2024-25 की पहली तिमाही- 5 फीसदी
2024-25 की दूसरी तिमाही- 4 फीसदी
2024-25 की पहली तिमाही- 4.6 फीसदी
2024-25 की पहली तिमाही- 4.7 फीसदी

वित्त वर्ष 2023-24 में भारतीय रुपये में सबसे कम उतार-चढ़ाव देखा गया. विनिमय दर काफी स्थिर बनी हुई है.

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 622.5 अरब डॉलर पर है जो सभी विदेशी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त है.

वित्त वर्ष 2023-24 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भारत का सेवा निर्यात मजबूत रहा है.

भारत विदेश से भेजे जाने वाले धन के मामले में सबसे आगे बना रहेगा.

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि रेगुलेशन के दायरे में आने वाली यूनिट्स अनुपालन की प्रकृति, कंज्यूमर प्रोटेक्शन और संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगी.

लोन मार्केट में नीतिगत दर में बदलाव का पूरा असर और लाभ अभी तक नहीं पहुंचा है.

ग्रामीण मांग में तेजी जारी है, शहरी खपत मजबूत बनी हुई है.

देश के चालू खाता घाटे में खासी कमी देखी गई है और ये मौजूदा वित्त वर्ष यानी साल 2023-24 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में घटकर 1 फीसदी पर आ गया है. इससे पिछले वित्त वर्ष यानी 2022-23 की दूसरी तिमाही में ये 3.8 फीसदी पर था ।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *