पतंजलि की सोन पापड़ी फूड टेस्ट में फेल, तीन लोगों को छह माह की जेल की सजा
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पतंजलि की सोन पापड़ी फूड टेस्ट में फेल, तीन लोगों को छह माह की जेल की सजा

May 19, 2024
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  • पतंजलि के उत्पादों की गुणवत्ता पर डेंट
  • पिथौरागढ़ में लिये सोनपापड़ी के नमूने फेल आये
  • असिस्टेंट मैनेजर समेत तीन लोगों को सुनाई सजा
  • तीनों पर जुर्माना भी लगाया है कोर्ट ने 
  • भ्रामक विज्ञापनों पर अवमानना केस झेल रहे हैं बाबा रामदेव

बाबा रामदेव की पतंजलि कंपनी के उत्पादों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होने का सिलसिला रूकने का नाम नहीं ले रहा है। भ्रामक विज्ञापन देकर देश व कोर्ट को गुमराह करने के आरोपों से जूझ बाबा रामदेव व उनकी कंपनी को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ने एक और झटका दे दिया है। यहां पतंजलि कंपनी की सोन पापड़ी फूड टेस्‍ट में फेल गई है। मुख्‍य न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के असिस्‍टेंट मैनेजर समेत तीन लोगों को छह माह जेल की सजा सुना दी है। साथ ही तीनों पर अर्थ दंड भी लगाया गया है।

बता दें कि यह पूरा मामला 2019 से जुड़ा है। फूड सेफ्टी इंस्‍पेक्‍टर ने पिथौरागढ़ के बेरीनाग इलाके में लीलाधर पाठक की दुकान से सैंपल लिए थे। दरअसल, पतंजलि नवरत्‍न इलायची सोन पापड़ी को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। दुकानदार के साथ ही पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को भी नोटिस जारी किया गया था। दिसंबर 2020 में उधम सिंह नगर में प्रयोगशाला में जांच की गई जिसमें सोन पापड़ी घटिया गुणवत्‍ता की निकली। इसके बाद दुकान मालिक लीलाधर पाठक, डिस्‍ट्रीब्‍यूटर अजय जोशी और पतंजलि के असिस्‍टेंट मैनेजर अभिषेक कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

यह मामला कोर्ट पहुंचा तो अदालत ने फूड सेफ्टी की धाराओं में तीनों आरोपियों को छह माह जेल की सजा सुनाई है। साथ ही  लीलाधर पाठक पर पांच हजार, अजय जोशी पर दस हजार और अभिषेक कुमार पर पच्चीस हजार रुपये का जुर्माना कोर्ट ने लगाया है।  कोर्ट ने अपना यह फैसला खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत सुनाया है।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि पतंजलि आयुर्वेद और दिव्य फार्मेसी के 14 प्रॉडक्ट्स के लाइसेंस पर लगा बैन हटा दिया गया है। उत्तराखंड सरकार ने एक हाई लेवल समिति की शुरुआती जांच रिपोर्ट मिलने के बाद बैन लगाने के अपने पूर्व के आदेश पर स्टे दे दिया। 30 अप्रैल को पतंजलि आयुर्वेद और दिव्य फार्मेसी के 14 प्रॉडक्ट्स के मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस को उत्तराखंड सरकार की लाइसेंस अथॉरिटी ने निलंबित कर दिया था। हाई लेवल कमिटी ने तर्क देते हुए कहा कि जिस तरीके से लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने ये आदेश पारित किया था, वह गलत था। जिन 14 प्रॉडक्ट के लाइसेंस पर बैन लगाया गया था, उनमें श्वासारि गोल्ड, श्वासारि वटी, श्वासारि प्रवाही, श्वासारि अवलेह, मुक्ता वटी आदि शामिल हैं।

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