भाग्यश्री हॅास्पिटल समेत डीएन कालेज की 41 दुकानें सील
- डीएन कालेज प्रबंधन की दुकाने सील
- इंडियन ओवरसीज बैंक की बिल्डिंग सील
- किराये से ज्यादा है गृहकर, कहां से दे प्रबंधन
- डा.अमिताभ गौतम देते हैं मात्र 11 सौ रुपये
- अधिकांश दुकानदार देते हैं 280 रुपये प्रति माह
- भाग्यश्री हास्पिटल का एक हिस्सा भी किया सील
- संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता ने जताई नाराजगी
- डीएन कालेज पर साढ़े आठ लाख बकाया
- भाग्यश्री पर 22 लाख से ज्यादा बकाया
मेरठ नगर निगम की टीम ने आज बकाया गृहकर न करने पर ताबड़तोड़ कार्यवाही करते हुए डीएन कालेज की 41 दुकानों को सील कर दिया। इसके अलावा गढ़ रोड स्थित भाग्यश्री हास्पिटल को भी सील कर दिया गया। तीन लाख रुपये का चेक देने पर उसके सीटी कक्ष को सील कर टीम वापस लौट आई। संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता को लेकर डीएन कालेज के दुकानदारों ने नगर आयुक्त से मुलाकात कर सील खोलने का आग्रह किया। इस दौरान यह तथ्य भी निकलकर सामने आया है कि जितनी धनराशि बतौर किराया दुकानदार डीएन कालेज प्रबंधन को दे रहे हैं उससे कहीं अधिक राशि गृहकर के रूप में प्रबंधन को देने पड़ रही है। यहां सबसे अधिक किराया फिजिशियन डा अमिताभ गौतम ग्यारह सौ रुपये प्रतिमाह दे रहे हैं।
डीएन कालेज के बाहर बनी दुकानों के मालिक आज सुबह जब दुकान खोलने पहुंचने तो वहां सील लगी पाई। नगर निगम द्वारा लगाई गई सील देखकर व्यापारियों के चेहरे पर पेशानी के भाव आ गये। तुरंत ही संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता से संपर्क किया गया। प्रबंधन से बात करने पर पता चला कि जितनी धनराशि किराये के रूप में दुकानदार दे रहे हैं उससे कहीं अधिक धनराशि का गृहकर बकाया है। वर्तमान में साढ़े आठ लाख रुपये गृहकर का डीएन कालेज प्रंबधन पर बकाया है। यह भी जानकारी में आया है कि यहां पिछले चालीस साल से काबिज दुकानदार 280 रुपये प्रतिमाह तक बतौर किराया दे रहे हैं। डा अमिताभ गौतम सर्वाधिक ग्यारह सौ रुपये प्रतिमाह बतौर किराया दे रहे हैं।
इसके बाद सभी ने नगर आयुक्त अमित पाल शर्मा से मुलाकात की। संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता ने कहा कि यदि डीएन कालेज प्रबंधन ने गृहकर का भुगतान नहीं किया है तो इसके लिये दुकानदारों को कैसे दुविधा में डाला जा सकता है। दुकानदार तो बकायदा अपने किराये का भुगतान करते चले आ रहे हैं।
अंत में तय पाया गया कि गृहकर का 65 प्रतिशत भुगतान दुकानदार जबकि बाकी 35 प्रतिशत का भुगतान डीएन कालेज प्रबंधन द्वारा किया जायेगा। इस दौरान यह भी जानकारी में आया है कि डीएन कालेज प्रबंधन पर साढ़े आठ लाख रुपये से ज्यादा बकाया है। अजय गुप्ता ने सवाल किया कि इसके लिये दोषी अफसरों व स्टाफ की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिये जिनकी लापरवाही से गृहकर की इतनी मोटी धनराशि बकाया हो पाई। डीएन कालेज की इन दुकानों में इंडियन ओवरसीज बैंक भी शामिल हैं। जिसे सील कर दिया गया है।
उधर, गढ़ रोड मंगल पांडेय स्थित भाग्यश्री हास्पिटल पर करीब 22 लाख रुपये बकाया होने पर नगर निगम की टीम ने हास्पिटल के एक हिस्से को सील कर दिया। बाद में तीन लाख रुपये का चेक देने पर केवल सीटी कक्ष को सील कर टीम वापस आ गई। संचालक पंकज त्यागी का यह भी कहना है कि जो बकाया धनराशि दिखाई गई है वह गलत है।
उधर, पूर्व पार्षद और संयुक्त व्यापार संघ मंत्री विजय आनंद ने अपर आयुक्त ब्रजपाल सिंह से वार्ता कर कहा कि दुकानों को सील करने से पूर्व कोई नोटिस नहीं दिया गया। फिर कभी भी अचल संपत्ति सील नहीं की जा सकती है, चल संपत्ति को ही सील किया जा सकता है। इसके अलावा किराये से ज्यादा गृहकर नहीं हो सकता। विजय आनंद का यह भी कहना है कि नगर निगम ने बड़ी संख्या में ऐसे भवनों को छोड़ रखा है जिन पर गृहकर लागू ही नहीं किया गया है। निगम को पहले उन पर भी ध्यान देना चाहिये।
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3 Comments
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