“अपने व बाहरी” के बीच फंसे शास्त्रीनगर के प्रभावित लोग
- अपने व बाहरी के बीच फंसे शास्त्रीनगर के प्रभावित लोग
- कोर्ट से ही मिल सकती है इन लोगों को कुछ राहत
- सुप्रीम कोर्ट ने ध्वस्तीकरण की रिपोर्ट मांगी है अब
- क्रियान्वयन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है जुलाई में
- सुप्रीम कोर्ट के चलते भाजपा प्रतिनिधि दूरी बनाये हुए हैं
- विपक्षियों को मुंह नहीं लगा रहे हैं प्रभावित लोग
सेंट्रल मार्केट शास्त्रीनगर में इन दिनों अजीबोगरीब हालात हैं। भाजपा के जनप्रतिनिधि उधर आने को तैयार नहीं हैं और दूसरे दलों के नेताओं को प्रभावित पक्ष मुंह नहीं लगा रहा है। वह भी तब जबकि प्रभावित लोग बराबर सांसद अरुण गोविल, मंत्री सोमेंद्र तोमर,महापौर हरिकांत अहलुवालिया और कैंट विधायक अमित अग्रवाल की बेरुखी पर सवाल करते हुए तीखे कटाक्ष भी कर रहे हैं। मामला चूंकि सुप्रीम कोर्ट की अवमानना से जुड़ा है लिहाजा सरकार के नुमाइंदे होने के नाते भाजपा के नुमाइंदे कीप डिस्टेंस की स्थिति में हैं। इस बीच, पुलिस प्रशासन का भी प्रयास है कि प्रभावित लोगों के धरने आदि में कोई भी बाहरी लोग शामिल न हो। कांग्रेस नेत्री रीना शर्मा को धरना स्थल से उठाते हुए हिरासत में लेकर थाने भेज दिया गया। थाने में कांग्रेसियों की नौचंदी थाना इंस्पेक्टर से खासी बहस हुई। इंस्पेक्टर ने कहा कि यदि व्यवस्था बिगड़ेगी तो पुलिस कार्रवाई करेगी। इस पर महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा ने कहा कि वह कल कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को लेकर आ रहे हैं, रोक लेना, इस दौरान इंस्पेक्टर अनूप सिंह को यह कहते हुए सुना गया कि कल क्या हम अभी भी रोक लेंगे, यहां धमकी मत दीजिये।
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दरअसल,सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 661/6 ध्वस्त कर दिया गया। इसी कड़ी में 44 दुकानों को सील करने की रिपोर्ट आवास एवं विकास परिषद की तरफ से दे दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने रिहायश में बनाई गई दुकानों को समाप्त करने के साथ ही सेटबैक छोड़ने के आदेश दिये हैं। सेट बैक छोड़ने पर ऊपर बनी बिल्डिंग भरभरा कर गिर जायेगी, इस आशंका के चलते प्रभावित परिवार की महिलाएं दस अप्रैल से धरनारत हैं। वे गुहार लगा रही हैं कि उन पर कुछ रहम किया जाये। क्योंकि रोजगार तो खत्म हो ही गया है, अब कम से कम सिर से छत तो नहीं उजाड़ी जाये। लेकिन मजबूरी यह है कि आवास एवं विकास परिषद को जुलाई माह में अपनी क्रियान्वयन रिपोर्ट सबमिट करनी है,यानी उससे पहले ही सेट बैक को खाली कराने के अलावा अन्य कोई विकल्प फिलहाल नजर नहीं आ रहा है। फर्स्ट बाइट.टीवी का मानना है कि चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट की अवमानना से जुड़ा है, इसलिये प्रभावित लोगों को अच्छे वकील के जरिये सुप्रीम कोर्ट का ही दरवाजा खटखटाना चाहिये, अन्य किसी और का नहीं।
इस बीच,आज कांग्रेस की नेत्री रीना शर्मा धरना स्थल पर पहुंची ही थी कि नौचंदी इंस्पेक्टर ने उन्हें हिरासत में लेते हुए गाड़ी से थाने भेज दिया। सूचना पाकर थाने पहुंचे कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा से पहले थाने और फिर धरना स्थल पर खूब नोकझोक हुई।
उधर, पहले दिन से ही प्रभावित लोगों के साथ खड़े व्यापार मंडल अध्यक्ष शैंकी वर्मा ने कहा है कि पुलिस प्रशासन द्वारा बार बार यह कहा जाना कि बाहरी लोग इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं, यह बेहद आपत्तिजनक व दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सवाल किया है कि क्या मेरठ में रहने वाला प्रत्येक नागरिक इस शहर का हिस्सा नहीं है। यदि किसी क्षेत्र का व्यक्ति इन प्रभावित लोगों से मिलता है तो वह बाहरी कैसे हो गया।