केंद्र से कोई झगड़ा नहीं, संघ भाजपा के लिये फैसले भी नहीं करता-मोहन भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विवाद या भड़काऊ स्थिति में कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए, बल्कि कानूनी व्यवस्था पर भरोसा करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट कहा कि यह सच नहीं है कि आरएसएस भाजपा के लिए फैसले लेता है। जेपी नारायण से लेकर प्रणब मुखर्जी तक, लोगों ने हमारे बारे में अपना नजरिया बदला है। इसलिए हमें किसी के नजरिए में बदलाव की संभावना से कभी इनकार नहीं करना चाहिए। आरएसएस भाजपा के लिये निर्णय लेता है यह कहना भी पूर्णत गलत है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि तकनीक और आधुनिकता शिक्षा के विरोधी नहीं हैं। शिक्षा केवल जानकारी नहीं है, यह व्यक्ति को सुसंस्कृत बनाने के बारे में है। नई शिक्षा नीति में पंचकोसीय शिक्षा के प्रावधान शामिल हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) सही दिशा में एक कदम है।
#WATCH | Delhi: RSS chief Mohan Bhagwat says, “Humare yahan mat bhed ho sakta hai par mann bhed nahi hai…Does RSS decide everything? This is completely wrong. This cannot happen at all. I have been running the Sangh for many years, and they are running the government.… pic.twitter.com/qClvA9HPFF
— ANI (@ANI) August 28, 2025
दरअसल, संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर आरएसएस द्वारा 100 वर्ष की संघ यात्रा – ‘नए क्षितिज’ के तहत अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। गुरुवार को संघ प्रमुख मोहन भागवत ने परिवार को एकजुट करने के तरीके भी बताए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक-दूसरे के पर्व-त्योहारों में शामिल होकर सामाजिक एकता मजबूत होती है, साथ ही प्रेम और करुणा बढ़ती है।
संघ प्रमुख ने कहा कि विवाद या भड़काऊ स्थिति में कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए, बल्कि कानूनी व्यवस्था पर भरोसा करना चाहिए। हमारे देश की विविध संस्कृति में विभिन्न जाति, पंथ, और समुदाय के लोग रहते हैं. इन सबके बीच सौहार्द बनाए रखने और संबंध मजबूत करने के लिए एक-दूसरे के पर्व-त्योहारों में सम्मिलित होना बहुत जरूरी है।
#WATCH | RSS chief Mohan Bhagwat says, “…So all these things create an appearance that there is a quarrel. But there might be a struggle, but there is no quarrel, as the goal is the same, which is the good of our country….” https://t.co/1Yj1KvBnVP pic.twitter.com/u4KVGxtYgg
— ANI (@ANI) August 28, 2025
उन्होंने समझाया कि ऐसा करने से सामाजिक दूरियां घटती हैं और विश्वास बढ़ता है। इसके साथ ही समाज में प्रेम और करुणा की भावना पनपती है। दूसरों की खुशियों में शामिल होने से समाज में समरसता आती है और आपसी भेद-भाव कम होते हैं।
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