
शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को तीन सप्ताह की फिलहाल राहत
- भूखंड 661/6 पर बने काम्पलेक्स पर संकट के बादल
- कोर्ट इसे खाली कर ध्वस्त करने का दे चुका है आदेश
- 17 मार्च तक दुकाने की जानी थी खाली,
- व्यापारियों ने इस अवधि को अपर्याप्त बताते हुए याचिका दाखिल की
- सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तीन सप्ताह का समय और दिया
शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल फौरी राहत मिल गयी है। व्यापारियों ने दुकाने/काम्पेलक्स खाली करने के लिये और समय दिये जाने की मांग करते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए आवास एवं विकास परिषद से कुछ सवालों का जवाब मांगते हुए तीन सप्ताह का समय फिलहाल दे दिया है। व्यापारी नेता किशोर वाधवा ने इस बड़ी राहत बताया है।

दरअसल, शास्त्रीनगर विशेषत सेंट्र्ल मार्केट में आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक काम्पलेक्स का निर्माण कर लिया गया है। इसे लेकर काफी समय से उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद और सेंट्र्ल मार्केट के व्यापारियों के बीच रस्साकशी चली आ रही है। 17 दिसम्बर 2014 को खंडपीठ ने दुकाने खाली करते हुए इस काम्लेक्स को ध्वस्त करने का आदेश दिये थे। फिलहाल यह आदेश सेंट्र्ल मार्केट स्थित भूखंड संख्या 661/6 के लिये दिया गया है। इनहें खाली करने के लिये तीन माह का समय दिया गया था। यह अवधि 17 मार्च को समाप्त हो गई।
इस पर व्यापारियों ने दुकानें खाली करने के समय को अपर्याप्त बताते हुए इस अवधि को बढ़ाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। आज इस याचिका पर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल व्यापारियों को तीन सप्ताह का समय देते हुए फौरी राहत दे दी है। यानी उत्तर प्रदेश आवास एंव विकास परिषद को जो ध्वस्तीकरण करना है ,उसे अब वह तीन सप्ताह बाद करेगा।

हालांकि व्यापारियों का मानना है कि इस फैसले के बाद उन्हें बड़ी राहत के संकेत मिल रहे हैं। व्यापारियों की इस मुद्दे पर लड़ाई लड़ रहे राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत वाजपेयी का कहना है कि यह समय वैकल्पिक व्यवस्था के लिए दिया गया है। पुन: सुप्रीम कोर्ट से एक साल का समय मांगा जाएगा। इसके साथ ही सरकार के सामने भी शहर के इन बाजारों की समस्या रखी जाएगी। प्रदेश सरकार के माध्यम से आवास विकास परिषद द्वारा इस भूमि को मिश्रित भू उपयोग में परिवर्तित करने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस मामले में व्यापारियों की ओर से कई याचिकाएं अलग अलग दायर की गई हैं। इसमें पुनर्विचार का भी आग्रह किया गया है।
शनिवार को हुई व्यापारियों संग बैठक में भी डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने दोहराया था कि भविष्य में यह संकल्प भी व्यापारियों को दिलवाने का काम किया जायेगा कि भू उपयोग के विरुद्ध कोई भी निर्माण कम से कम व्यापारी समाज तो नहीं करेगा।
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