‘स्वयं से पहले आप’ की भावना ही एनएसएस की आत्मा- राज्यपाल
उत्तराखंड

‘स्वयं से पहले आप’ की भावना ही एनएसएस की आत्मा- राज्यपाल

Spread the love

राज्यपाल ने एनएसएस स्वयंसेवकों को दी बधाई, कहा- ‘सेवा और अनुशासन की मिसाल हैं आप’

देहरादून। गणतंत्र दिवस परेड 2025 में प्रतिभाग करने वाले राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) उत्तराखण्ड इकाई के पांच स्वयंसेवकों ने मंगलवार को राजभवन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) से भेंट की। इन स्वयंसेवकों में राहुल कान्तिपाल, अनुराग सिंह पंवार, तनुजा रावत, अंजली रावत और मेघा शर्मा शामिल रहे, जिन्होंने कर्तव्य पथ, नई दिल्ली पर आयोजित परेड में उत्तराखण्ड का गौरवपूर्ण प्रतिनिधित्व किया।

राज्य एनएसएस अधिकारी डॉ. सुनैना रावत ने जानकारी दी कि गणतंत्र दिवस शिविर के लिए उत्तराखण्ड से 16 स्वयंसेवकों का चयन हुआ था, जिनमें से 5 श्रेष्ठ स्वयंसेवकों ने 1 से 31 जनवरी 2025 तक दिल्ली शिविर में सहभागिता की और 26 जनवरी को आयोजित परेड में भाग लिया।

राज्यपाल ने स्वयंसेवकों को बधाई देते हुए कहा कि एनएसएस सेवा, अनुशासन और राष्ट्रीय चेतना की मिसाल है। गणतंत्र दिवस विशेष शिविर केवल सम्मान का अवसर नहीं, बल्कि विविधता में एकता के अनुभव, संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी माध्यम है।

राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों से भेंट का अनुभव युवाओं के जीवन में प्रेरणा का स्रोत बनेगा। यह गौरवपूर्ण अवसर उनके कंधों पर सामाजिक जिम्मेदारी का भी आह्वान है।

उन्होंने ‘‘एक पेड़ माँ के नाम’’ अभियान के तहत 28,000 से अधिक वृक्षारोपण, स्वच्छता ही सेवा अभियान, रक्तदान शिविर जैसे सामाजिक कार्यों में एनएसएस की भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रयास केवल सराहनीय नहीं, प्रेरणादायक भी हैं। स्वयंसेवकों द्वारा उन्हें भेंटस्वरूप दिया गया पौधा उनकी भावनात्मक सहभागिता का प्रतीक है।

राज्यपाल ने कहा कि ‘‘स्वयं से पहले आप’’ की भावना को जीना ही एनएसएस की आत्मा है। जब युवा सोचते हैं कि ‘‘मैं समाज के लिए क्या कर सकता हूं’’, तभी सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ठोस कदम बढ़ते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में कोई न कोई विशेष लक्ष्य अवश्य निर्धारित करें।

इस अवसर पर विशेष प्रमुख सचिव अमित कुमार सिन्हा, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के क्षेत्रीय निदेशक राजेश तिवारी और डीआईटी विश्वविद्यालय के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. नवीन सिंघल उपस्थित रहे।