अब पाक बोला-ट्रंप ने दोनों देशों के बीच युद्ध टालने का काम किया,शान में पढ़े कसीदे
- नोबल पीस प्राइज के लिए ट्रंप को किया नॉमिनेट
- पाक फील्ड मार्शल ने भी की थी ट्रंप के लिए मांग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर में सुर मिलाते हुए अब पाकिस्तान ने भी दावा किया है कि भारत पाक टकराव के दौरान ट्रंप की कूटनीतिक पहल व मध्यस्थता ने एक बड़े युद्ध को टालने का काम किया है। इसके साथ ही पाकिस्तान ने ट्रंप का नाम नोबल शांति पुरष्कार के लिये भी नामित कर दिया है।
पहलगाम में हुए आंतकी हमले के बाद भारत सरकार ने आपरेशन सिंदूर के तहत कई कड़े कदम उठाकर पाकिस्तान सरकार को परेशानी में डाल दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी स्पष्ट किया है कि आपरेशन सिंदूर स्थगित जरूर किया गया है लेकिन यह चालू है। किसी भी आतंकी घटना को अब भारत पर हमला माना जायेगा। भारतीय सेना ने अपनी सीमा में रह कर जिस तरह अदम्य साहस का परिचय देते हुए आतंकी ठिकानों पर बम बरसाये उसने पाक आकाओं की नींद उड़ा दी थी।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि व्यापार का हवाला देते हुए उन्होंने दोनों देशों को सीज फायर करने के लिये बाध्य किया। ट्रंप ने ऐसा एक बार नहीं बल्कि कई मर्तबा अलग अलग जगह कहा। ट्रप के इस बयान के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला था।
इन सब के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाक सेना प्रमुख असीम मुनीर को व्हाइट हाउस बुलाकर तमाम संकेत दे दे दिया। ट्रंप ने यहां तक कहा कि जब उन्हें पता है कि पाकिस्तान में सेना प्रमुख ही सब कुछ है तो फिर वह जनता द्वारा चुनी गई सरकार के नुमाइंदे से क्या बात करें। असीम मुनीर से लंबी वार्ता के बाद ट्रंप के भारत के प्रति बदला हुआ रवैया साफ देखा गया।
इसका नतीजा पाकिस्तान द्वारा डोनाल्ड ट्रंप को नोबल शांति पुरस्कार के लिये नामित करने के रूप में सामने आया है। पाकिस्तान ने जारी बयान में कहा कि 2025 में भारत और पाकिस्तान की जंग के दौरान ट्रंप के निर्णायक कूटनीतिक हस्तक्षेप और महत्वपूर्ण नेतृत्व की वजह से ट्रंप का नाम नोबल शांति पुरस्कार के लिए प्रस्तावित करने का फैसला किया गया। पाकिस्तान ने भारत के साथ सीजफायर कराने के लिए ट्रंप के हस्तक्षेप की सराहना करते हुए कहा कि ट्रंप के प्रयासों की वजह से सीजफायर हुआ है जिससे युद्ध का एक बड़ा खतरा टल सका. वह इस पुरस्कार के असली हकदार हैं।
इस बीच,ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ मिलकर हमने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो और रिपब्लिक ऑफ रवांडा के बीच संधि कराई है। दोनों के बीच का युद्ध दशकों से हो रहे रक्तपात के लिए जाना जाता रहा है। यह अफ्रीका के लिए बेहतरीन दिन है और दुनिया के लिए भी बेहतरीन दिन है। लेकिन उन्हें (ट्रंप) इसके लिए शांति का नोबल पुरस्कार नहीं मिलेगा।
ट्रंप ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच यु्द्ध रुकवाने के लिए भी उन्हें नोबल नहीं मिलेगा। सर्बिया और कोसोवा के बीच युद्ध रुकवाने के लिए भी उन्हें शांति का नोबल नहीं मिलेगा। मिस्र और इथियोपिया के बीच शांति बहाली के लिए भी नोबल नहीं मिलेगा। ऐसा कह कर डोनाल्ड ट्रंप ने अपने निशाने को साधने का काम किया है यानी नोबल शांति पुरस्कार।
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