नाक रगड़ाई प्रकरण पर विराम,सत्यम ने कहा-मुझसे कोई रंगदारी नहीं मांगी गई
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नाक रगड़ाई प्रकरण पर विराम,सत्यम ने कहा-मुझसे कोई रंगदारी नहीं मांगी गई

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  • तेजगढ़ी चौराहे पर हुई थी यह घटना
  • वायरल वीडियो से सामने आया नाक रगड़ाई कांड
  • विकुल चपराना की आड़ में मंत्री सोमेंद्र को बनाया गया निशाना
  • इस कांड ने ले लिया था जातीय विद्वेष का रूप
  • “इधर कुंआ उधर खाई” में फंस गयी थी भाजपा
  • कैंट विधायक अमित अग्रवाल के प्रयास रंग लाये
  • विधायक अमित के घर लिखी गयी समझौते की पटकथा
  • भाजपा के दबाव में विकुल पर लगी थी रंगदारी की धारा
  • बड़ा सवाल-क्या झूठ पर ताना बाना बुनती है मेरठ पुलिस

 

मेरठ। शास्त्रीनगर के बेहद चर्चित “नाक रगड़ाई प्रकरण” पर आज विराम लग गया। कैंट विधायक अमित अग्रवाल व अन्य  भाजपा जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में सत्यम रस्तोगी ने यह शपथ पत्र दे दिया कि उससे कोई रंगदारी नहीं मांगी गई थी। इससे अब विकुल चपराना की जमानत होने का मार्ग प्रशक्त हो गया है। भाजपा नेताओं के भारी दबाव के बाद ही पुलिस ने जमानत पर रिहा विकुल चपराना पर रंगदारी की संगीन धारा भी लगा दी थी। इसी आधार पर विकुल को दोबारा से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

दरअसल, 19 अक्टूबर को तेजगढ़ी चौराहे पर पार्किंग विवाद के बाद एक वीडियो वायरल हो गया जिसके बाद विवाद तेजी से बढ़ गया। इस वीडियो में भाजपा नेता विकुल चपराना को कारोबारी सत्यम रस्तोगी पर चिल्लाते हुए देखा जा रहा था। गाली गलौज के दौरान ही सत्यम हाथ जोड़कर व सड़क पर नाक लगाते हुए माफी मांगते हुए नजर आ रहा था। दिलचस्प बात यह रहा कि जिस रोज यह विवाद हुआ उसी रात दोनों पक्षों के बीच मेडिकल थाने में समझौता हो गया था लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।

तूल कुछ इस कदर बढ़ा कि मामला जातीय मोड़ पर जा पहुंचा। जातीय विवाद में सत्यम रस्तोगी के पक्ष में वैश्य जबकि विकुल के समर्थन में गुर्जर समाज आ खड़ा हुआ। इसका असर यह हुआ कि भाजपा के तमाम बड़े पदाधिकारियों ने एसएसपी से मुलाकात की और विकुल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर डाली। इसका असर यह हुआ कि विकुल चपराना पर रंगदारी जैसी गंभीर धारा में मुकदमा दर्ज कर दिया गया। पुलिस ने दबाव में आकर यह धारा जरूर लगा दी थी लेकिन इसे कोर्ट में साबित करना बड़ा मुश्किल था, इसमें कोई संदेह नहीं है।

इतना ही नहीं, पूर्व में जमानत पाये विकुल चपराना को दोबारा से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके साथ ही उसके तीन अन्य साथी भी जेल भेज दिये गये। गुर्जर समाज ने गुर्जर बाहुल्य काजीपुर में इस बाबत आंदोलन का निर्णय लेने के लिये पंचायत आहूत कर दी। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अब जातीय आधारित गतिविधियां नहीं हो सकती लिहाजा इसे सर्वसमाज की पंचायत का नाम दिया गया। बाद में इसे पंचायत की बजाय बैठक यानी उसका छोटा रूप कर दिया गया। हालांकि इस बैठक में भी ज्ञापन देने अथवा थोड़ी देर बाद देने का विषय भी विवाद का कारण बन गया।

आधे लोग पुलिस क्षेत्राधिकारी को ज्ञापन देकर तुरंत ही वहां से चले गये जबकि बड़ी संख्या में रह गये लोगों ने वहां दोबारा से बैठक की। हालांकि पुलिस का दबाव बराबर था कि यह बैठक पूर्वाह्न 11 बजे तक समाप्त कर दी जाए। शाम तक गुर्जर नेता पवन गुर्जर, अमित भड़ाना समेत छह लोगों को नामजद करते हुए 30-40  अज्ञात लोगों के खिलाफ पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करा दी। इसने जातीय राजनीति में घी का काम किया।

इधर, चूंकि दोनों ही पक्ष भाजपा से जुड़े हैं लिहाजा एक बारगी पार्टी के लिये इधर कुंआ उधर खाई जैसे हालात भी बन गये। वहीं सत्यम रस्तोगी ने पहले ही दिन स्पष्ट कर दिया था कि यह विवाद दो लोगों के बीच पार्किग को लेकर हुआ विवाद था,  इससे मंत्री सोमेंद्र तोमर का कोई लेना देना नहीं हैं, लेकिन विपक्षी (चाहें वे भाजपा से रहे या फिर अन्य राजनीतिक दलों से) बराबर सोमेंद्र तोमर को इस मामले में लपेटने की कोशिश करते रहे।

इन सब के बीच भाजपा के कैंट विधायक अमित अग्रवाल ने सकारात्मक पहल करते हुए बीते दिवस कुछ ऐसा किया कि दोनों ही पक्ष बैठने के लिये तैयार हो गये। सत्यम रस्तोगी के परिजन भी लिखित में इस आशय का समझौता करने के लिये तैयार हो गये कि उनसे विकुल चपराना द्वारा कोई रंगदारी नहीं मांगी गई है।

चूंकि सत्यम रस्तोगी के समर्थन में भाजपा सांसद अरुण गोविल, राज्य सभा सद्स्य डा.लक्ष्मीकांत वाजपेयी, जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा,महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी, मंत्री दिनेश खटीक, एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज की मौजूदगी में ही एसएसपी से मुलाकात की गई थी लिहाजा आज सभी की मौजूदगी में समझौता कराने का फैसला लिया गया।

https://youtu.be/BVFiFZfrztM

सूत्रों के मुताबिक चार बजे भाजपा के उपरोक्त पदाधिकारी सर्किट हाउस पहुंच गये। वहीं सत्यम रस्तोगी व विकुल चपराना के परिजन भी पहुंच गये। दोनों ही पक्षों ने इस जातीय विद्वेष को सनातन पर कुठाराघात पाते हुए समझौता करने का फैसला ले लिया।  सत्यम रस्तोगी की तरफ से उस शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करा लिये गये जो कैंट विधायक अमित अग्रवाल के घर पर बीती रात ही तैयार कर लिया गया था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को संबोधित इस शपथ पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उनसे विकुल चपराना की तरफ से न ही तो कोई रंगदारी मांगी गई है और न ही , उन्होंने इस आशय का कोई बयान विवेचनाधिकारी को दिया है। लिहाजा न्याय हित में निष्पक्ष जांच करते हुए बेबुनियाद व गलत धाराओं को हटाया जाना अति आवश्यक है।

आज इस बैठक में भाजपा सांसद अरुण गोविल, कैंट विधायक अमित अग्रवाल, एमएलसी धर्मेद्र भारद्वाज, जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा, महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी, महापौर हरिकांत अहलुवालिया आदि की मौजूदगी में रस्तोगी समाज से राष्ट्रीय महामंत्री हरिश्चंद्र वंशीय महासभा श्री राकेश रस्तोगी पूर्व सभासद, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री श्री राजू रसराज, पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री श्री संजीव रस्तोगी, राष्ट्रीय महामंत्री शिक्षा समिति श्री अशोक रस्तोगी पीएनबी, महानगर उपाध्यक्ष श्री संजीव रस्तोगी एलोरा व गुर्जर समाज से संयुक्त गुर्जर परिषद के अध्यक्ष श्री भोपाल सिंह गुर्जर, संयोजक श्री वीरेंद्र सिंह गुर्जर, सहसंयोजक श्री जगदीश पूठा, गुर्जर सभा अध्यक्ष श्री नवाब सिंह लखवाया, मेरठ ब्लॉक प्रमुख श्री नितिन कसाना, जिला पंचायत सदस्य श्री विपिन भड़ाना ,समाजसेवी श्री जगत सिंह दोसा, पार्षद श्री भारत सिंह भडाना, श्री अश्वनी गुर्जर लालपुर, श्री रणपाल काजीपुर ने  बैठक में भाग लिया।  बाहर होने के कारण इस बैठक में मंत्री सोमेंद्र तोमर और डा.लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने इस बैठक में भाग नहीं लिया। सोमेंद्र तोमर इन दिनों तभी से बिहार चुनाव में व्यस्त हैं।

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