जगन्नाथ शोभायात्रा कल धूमधाम से निकलेगी, दोनों पक्षों में बनी सहमति
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जगन्नाथ शोभायात्रा कल धूमधाम से निकलेगी, दोनों पक्षों में बनी सहमति

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कुछ गर्मागर्मी, कुछ नरमी और कुछ मनमुटाव..इन सब के बीच अंत में तय हुआ कि भगवान जगन्नाथ की शोभायात्रा पूर्व की भांति बेहद धूमधाम व भव्य तरीके से श्री बिल्वेश्रर मंदिर परिसर से निकाली जायेगी। पूर्व की भांति रथ पर भगवान श्री जगन्नाथ के साथ ही मंदिर के पुजारी व अन्य गणमान्य विराजमान होंगे। कहा गया कि सनातन धर्म की पताका लेकर सभी लोगों को सारे मनमुटाव भूलाकर इस रथयात्रा में तन मन और धन के साथ व सहयोग दोनों ही देना है। इससे पूर्व जिला प्रशासन द्वारा विजय कुमार गोयल के नाम से शोभा यात्रा निकालने की एकपक्षीय अनुमति दे दी थी। भाजपा पदाधिकारियों के दबाव में यह फैसला लिये जाने का आरोप लगाते हुए मंदिर के पुजारी व उनके समर्थक विरोध पर उतर आये थे। मंदिर के गेट पर ताला डाल दिया गया था।

सदर स्थित श्री बिल्वेश्वर नाथ मंदिर और मंदिर से भगवान जगन्नाथ की शोभायात्रा निकालने को लेकर काफी समय से दो पक्षों में विवाद चला आ रहा है। यह विवाद कोर्ट की सीमा तक चला गया है। इस विवाद के चलते ही पिछले साल जिला प्रशासन ने दोनों पक्षों को साथ लेकर शोभायात्रा निकालने का जिम्मा पुलिस को दे दिया था। ऐसा दोनों पक्षों के बीच आपसी तनातनी व टकराव को देखते हुए किया गया था। इस बार लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

विस्तार से देखिये 👇

https://youtu.be/9gupZNpFHRo

मंदिर से काफी समय से जुड़े छावनी परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष दिनेश गोयल के मुताबिक बीती रात सर्किट हाउस में भाजपा पदाधिकारियों के साथ हुई प्रशासनिक बैठक में शोभायात्रा निकालने का जिम्मा विजय कुमार गोयल पक्ष को देने का एकपक्षीय फैसला सुना दिया गया। इसे लेकर आज दोपहर बाद तक गरमागहमी के हालात बने रहे।

विवाद व टकराव उस वक्त चरम पर पहुंच गया जब विजय कुमार गोयल पक्ष के लोग मंदिर में भगवान जगन्नाथ की मूर्ति व रथ यात्रा के लिये लेने के लिये पहुंच गये। मंदिर पुजारी ने इससे इनकार करते हुए गेट पर ताला डाल दिया। यहां पुलिस के साथ विजय पक्ष की गर्मागर्मी भी हुई। बाद में दोनों पक्षों के बीच मंदिर परिसर में ही बैठक हुई जिसमें सर्वसम्मति से शोभायात्रा पूर्व की भांति व पूर्व व्यवस्था अनुसार निकालने का निर्णय लिया गया।

इस बैठक में व्यापारी नेता गणेश अग्रवाल को यह कहते हुए भी सुना गया कि सनातनियों की एकता सुनिश्चित करने व किसी के मन को कोई ठेस न पहुंचे इसके लिये ही वे सभी मंदिर परिसर में बैठे हैं। यदि किसी को  ठेस पहुंचानी है तो वह मंदिर के बाहर मिल लें, जो जोर आजमाइश करनी हो, कर ले। नई व्यवस्था के तहत जो भी पंडित विष्णु दत्त शर्मा व गणेश दत्त शर्मा जी कहेंगे वह सभी को मान्य होगा। इस बाद तय पाया गया कि शोभायात्रा के रथ पर पंडित विष्णु दत्त शर्मा व गणेश दत्त शर्मा के साथ ही पूर्व की भांति समिति पदाधिकारी मौजूद रहेंगे।

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