नौचंदी मेले का उद्घाटन कल, अभी तक कार्यों का टेंडर तक नहीं
- होली के बाद दूसरे रविवार को होता है शुभारंभ
- सैंकड़ों वर्षों से चला आ रहा है नौचंदी मेला
- एक साल नगर निगम तो दूसरे साल पंचायत लगाती है मेला
- कल उद्घाटन लेकिन ग्राउंड में छाई है नौकरशाही की वीरानी
- बड़े कामों को टुकड़ों में कर रेवड़ी बांटने का इंतजाम पूरा
- अभी तक विकास कार्यों का कोई टेंडर नहीं निकाला
- चहेते ठेकेदारों की पौ बारह, खूब चाट रहे मलाई
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक नौचंदी मेले का कल यानी 19 मार्च रविवार को उद्घाटन होना है। यह बात दीगर है कि अभी तक वहां चारों तरफ खाली ग्राउंड नजर आ रहा है। नौचंदी के सभी द्वारों पर अभी तक रंगाई पुताई नहीं हुई है, अलबत्ता शहीद द्वार को जरूर रंगाई पुताई कर कल के लिये तैयार किया जा रहा है। सड़कों के गड्ढे अपनी दुर्दशा का रोना रो रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी अलग पहचान व समाज को भाईचारे का संदेश देने वाला नौंचदी मेला इस बार फिर महज औपचारिकता के मकड़जाल में फंसता नजर आ रहा है। मेले के आयोजन की जिम्मेदारी नगर निगम मेरठ की की है लेकिन नौकरशाही ने लापरवाही का लाबदा ओढ़ रखा है। जो विकास कार्य वहां कराये जाने हैं, उन्हें बिना टेंडर कराये जाने की योजना एक बार फिर से फाइलों में तैयार हो गयी है। हर बड़े काम को छोटे छोटे कार्यों में कुछ इस तरह तैयार किया जा रहा है कि टेंडर निकालने की आवश्यकता ही न पड़े।

सैंकड़ों सालों की परम्परा के मुताबिक ऐतिहासिक नौचंदी मेले का उद्घाटन होली के बाद एक रविवार को छोड़कर दूसरे रविवार हो होता है। इस परम्परा को आगे बढ़ाते हुए जिला प्रशासन ने इसका शुभारंभ करने की तिथि 19 मार्च घोषित कर दी है। उद्घाटन मतलब..इस रोज से मेरठ और आसपाल के वाशिंदे अपनी ऐतिहासिक धरोहर का लुफ्त उठा सकते हैं लेकिन ऐसा होगा नहीं। नौचंदी ग्राउंड में चारों तरफ धूल का गुबार उड़ता नजर आ रहा है। अभी तक वहां कोई दुकान अथवा स्टाल नहीं लगा है। मैदान को साजने व संवारने का कार्य भी आज शनिवार से शुरू किया गया है। हालांकि बीते दिवस नगर आयुक्त अमित पाल शर्मा ने चंडी देवी मंदिर व ग्राउंड पहुंचकर कराये जाने वाले कार्यों की जानकारी ली थी।

प्राचीन श्री चंडी देवी मंदिर के पीठाधीश पं. संजय कुमार शर्मा ने जिलाधिकारी व नगर आयुक्त को दिये ज्ञापन में कहा है कि मेला नौचंदी का शुभारंभ पुरातन संस्कृति अनुसार चैत्र नवरात्रे आरंभ होने पर होता है लेकिन अब यह मेला चैत्र नवरात्रोंं के करीब एक माह बाद आरंभ होता है जो पुरातन संस्कृति के मुताबिक उचित नहीं है। इसके अलावा नौचंदी मेला कमेटी हर वर्ष प्राचीन श्री चंडी देवी मंदिर ट्रस्ट को पच्चीस हजार रुपये अनुदान देती है जो बेहद काम है, इसे एक लाख रुपये किया जाये। इसी क्रम में वर्ष 2022 के अलावा 2012, 2014, 2016, 2018 में नगर निगम द्वारा इन अनुदान का भी भुगतान नहीं किया है। संजय शर्मा ने मंदिर व आसपास की सड़कों की मरम्मत कराने की भी मांग की है।

उधर, नगर निगम ने अपनी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए बिना टेंडर निकाले विकास कार्य कराने की फाइले तैयार करना तेज कर दिया है। लाखों रूपये में होने वाले कार्यों को छोटे टुकड़ों में कराने की तैयारी की जा रही है। नौकरशाही का यह आलम है कि नौचंदी मेले की रंगाई पुताई का कार्य भी अपने चहेते ठेकेदारों से बिना टेंडर ही कराया जा रहा है। दिलचस्प और गंभीर तथ्य यह भी है कि कल नौचंदी मेले का प्रशासन द्वारा उद्घाटन किया जाना है लेकिन अभी तक नगर निगम ने किसी भी कार्य का टेंडर नहीं निकाला है। टेंडर प्रक्रिया भी सार्वजनिक नहीं की गई है। सतीश गुप्ता को अंदरखाने ही पेंटिंग, रंगाई पुताई व मरम्मत का जिम्मा दे दिया गया है।

बता दें कि नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार का मुद्दा विधानसभा में भी हाल ही में विधायक अतुल प्रधान ने उठाया था। विधायक ने आरोप लगाया था कि 28 प्रतिशत से ज्यादा कमीशन पर नगर निगम में काम कराये जा रहे हैं। यदि ये आरोप सही हैं तो पहले से कम धनराशि पर लिये गये टेंडर से कराये जाने वाले विकास कार्यों की गुणवत्ता 28 फीसदी कमीशन देने के बाद कितनी रहेगी यह सहज ही समझा जा सकता है।
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3 Comments
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