सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल के बर्खास्त प्रबंधक अनुज की जमानत याचिका खारिज
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सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल के बर्खास्त प्रबंधक अनुज की जमानत याचिका खारिज

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  • करीब ढाई घंटे चली लंबी जिरह
  • एंटी करप्शन कोर्ट ने की जमानत याचिका खारिज
  • कोर्ट ने माना कि अनुज पक्ष की दलील जमानत योग्य नहीं
  • गत 17 जनवरी को अनुज शर्मा को किया गया था गिरफ्तार
  • वित्तीय अनियमितताओं व फर्जी हस्ताक्षर करने के गंभीर आरोप
  • बर्खास्त प्रिंसिपल रश्मि मिश्रा की गिरफ्तारी न होने से सबूतों से छेड़छाड़ संभव-गिरीश कुमार  

करीब ढाई घंटे चली लंबी जिरह के बाद अंतत एंटी करप्शन कोर्ट ने सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल के बर्खास्त ट्रस्टी/प्रबंधक अनुज शर्मा की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि अनुज शर्मा के अधिवक्ता द्वारा दी गई दलील जमानत दिये जाने के योग्य नहीं हैं। अनुज शर्मा को गत 17 जनवरी को लोहियानगर थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। कोर्ट ने अनुज शर्मा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। अनुज शर्मा पर सत्यकाम एजुकेशनल ट्रस्ट के/सेटलर ट्रस्टी/ प्रेसिडेंट गिरीश कुमार शर्मा ने ट्रस्ट/स्कूल के खाते संचालित होने के बावजूद दूसरे बैंक में अकाउंट खुलवाकर फीस का गबन करने व  प्रेसिडेंट के फर्जी हस्ताक्षर से बैंक से लोन लेने जैसे गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसी रिपोर्ट पर यह गिरफ्तारी की गई थी। इस समस्त फर्जीवाड़े में स्कूल की तत्कालीन व मौजूदा समय में बर्खास्त प्रिंसिपल रश्मि मिश्रा की भी संलिप्तता है, दोनों के ही खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। यह बात और है कि पुलिस अभी तक रश्मि मिश्रा को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। गिरीश कुमार शर्मा का कहना है कि रश्मि मिश्रा के बाहर रहने से स्कूल के कागजातों व सबूतों से खिलवाड़ की आशंका है।

ट्रस्ट के सेटलर ट्रस्टी/ प्रेसिडेंट  गिरीश कुमार शर्मा द्वारा जारी किये गये बयान में बताया गया है कि इस ट्रस्ट के सेटलर ट्रस्टी/ प्रेसिडेंट वह स्वंय हैं।  स्थानीय होने के नाते ईश्वर सिंह शर्मा व उनके पुत्र अनुज शर्मा को साधारण ट्रस्टी बनाया गया था। मीडिया व समाज को गुमराह करने की उद्देश्य से बार बार यही दोहराया जा रहा है कि ये तीनों संस्थापक ट्रस्टी हैं जबकि इस सत्य को छिपाने की कोशिश की जा रही है कि गिरीश कुमार शर्मा इस ट्रस्ट में सर्वोच्च हैं और समस्त अधिकार बतौर सेटलर ट्रस्टी/ प्रेसिडेंट सिर्फ गिरीश कुमार शर्मा में ही निहित हैं। उन्होंने ही ट्रस्ट डीड में दिये गये अधिकार का प्रयोग करते हुए अनुज शर्मा को बर्खास्त व अपने अन्य परिजनों को इसमें शामिल किया है। अनुज शर्मा की बर्खास्ती ट्रस्ट/स्कूल के बैंक खाते होते हुए अपने व रश्मि मिश्रा के हस्ताक्षर से संचालित अलग से खाते खुलवाने व गिरीश कुमार शर्मा के फर्जी हस्ताक्षरों से बैंक लोन लेने समेत अन्य वित्तीय अनियमितता संबंधी आरोपों प्रमाणिकता साबित होने के बाद की गई है। इन्हीं सबूतों के आधार पर पुलिस ने अनुज शर्मा को गिरफ्तार किया है जबकि रश्मि व अन्य की गिरफ्तारी अभी लंबित है।

गिरीश कुमार शर्मा का कहना है कि मानवी शर्मा द्वारा बुलाई गई प्रेस वार्ता में भी ये लोग बराबर मान रहे हैं कि अनुज शर्मा की गिरफ्तारी दिये गये सबूतों के आधार पर की गई है, पुलिस उनके साथ अन्याय भी नहीं कर रही है, तो फिर किस अधिकार से मानवी व अजीत चौधरी खुली गुंडागर्दी दिखाते हुए उनके सामने स्कूल संचालन में बाधा पैदा कर रहे हैं।इससे पूर्व अनुज शर्मा व रश्मि मिश्रा ने अपने विश्वासपात्रों को चाहे वह योग्यता रखते हों अथवा नहीं स्कूल संचालन के लिये अलग से कमेटी भी बना डाली। अनुज शर्मा ने स्वयं को मैनेजर, रश्मि मिश्रा को मेंबर सेक्रेटरी, अमरप्रीत कौर व नीलू गर्ग को टीचर रिप्रेजेन्टेटिव, पारुल चौधरी को सीबीएसई नोमिनी,  पूजा गुप्ता व विजय तेवतिया को शिक्षाविद,सुनील कुमार शर्मा व सिमरन तिरखा को पेरेंट्स रिप्रेजेन्टेटिव और विवेक शर्मा को मेंबर दर्शाते हुए इस कमेटी का गठन कर दिया। इसमें कई नाम ऐसे हैं जो पहले से ही सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल में शिक्षक हैं लेकिन उन्हें अभिभावकों का प्रतिनिधित्व दिखाया गया है। सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल/संबंधित ट्रस्ट का बैंक खाता होते हुए भी अलग से स्वयं द्वारा संचालित अन्य बैंक में खाता खुलवाना और फिर एग्रीमेंट फॉर एस्टेब्लिशमेंट एंड गवर्नेंस आफ सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल मेरठ बॉडी ऑफ इंडिज्यूअवैल बनाना अनुज शर्मा व रश्मि मिश्रा की दूषित, स्वार्थपूर्ण व छल कपट व उस मुर्गी को एक बार ही काटना दर्शाता है जिसने सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल की स्थापना की है।

गिरीश कुमार शर्मा ने अपने बयान में कहा है कि  अनुज शर्मा पक्ष का कहना है कि सात जनवरी को सीनियर डिवीजन की अदालत से जो आदेश पारित हुए हैं उसकी हम अवमानना कर रहे हैं जबकि हकीकत यह है कि इस आदेश के पारित होने से काफी समय पूर्व ही  8 अक्टूबर को अनुज शर्मा व इसके बाद रश्मि मिश्रा को बर्खास्त किया जा चुका है। इस आदेश से पूर्व ही अनुज की गिरफ्तारी हो चुकी है। इस आदेश से पूर्व ही रश्मि मिश्रा की जगह नेहा आनंद को प्रधानाचार्य बना दिया गया है। यदि अनुज शर्मा की गिरफ्तारी पर यह आदेश लागू नहीं है तो फिर उन्हें किस आदेश के आधार पर स्कूल संचालन से रोका जा रहा है। नवनियुक्त प्रधानाचार्य नेहा आनंद को भी काम काज करने से रोका जा रहा है।  मानवी शर्मा किस अधिकार से अजीत चौधरी के साथ मिलकर वहां गुंडागर्दी व कब्जा करने पर उतारू हैं।  वहीं अनुज शर्मा पक्ष बराबर यह कहता आ रहा है कि उन्हें सीनियर डिवीजन आगरा से स्थगनादेश प्राप्त हैं। लिहाजा वहां यथा स्थिति बनायी रखी जाये।

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