वैक्सीन लगवाने वालों की सांस अटकी, मोदी सरकार को विपक्ष ने घेरा
- एस्ट्राजेनेका ने स्वीकारा,वैक्सीन से हो सकते हैं हार्ट अटैक
- एस्ट्राजेनेका ने यह भी स्वीकारा ब्रेन हैमरेज का खतरा भी बढ़ा
- खून के थक्के जमने की शिकायत में हुई इजाफा
- थ्रॉम्बोसिस थ्रॉम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम यानी TTS हो सकता है-कंपनी
- कोविशील्ड लगवाने वालों की सांस अटकी
- युवाओं की डांस करते करते हो रही है हार्ट अटैक से मौत
- मेरठ में डांस करती युवती की दो दिन पहले हुई मौत
- वैक्सीनेशन का श्रेय भाजपा ने लिया तो मौत का श्रेय भी ले-विपक्ष
- चुनावी माहौल में भाजपा के गले की हड्डी न बन जाये यह मामला
यह खबर निश्चित रूप से परेशान करने वाली है कि जिन लोगों ने कोविड-17 वैक्सीन यानी कोविशील्ड का इस्तेमाल किया है उनमें खतरनाक साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। इन साइड इफेक्ट में हार्ट अटैक और ब्रेम हैमरेज जैसे प्राणघातक व डरावने फैक्ट भी छिपे हैं। इस दवा को बनाने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका से ही भारतीय कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ने फार्मूला लिया था और कोविशील्ड नाम से दवा बनायी थी। कई लोगों की मौत के बाद यूपी हाईकोर्ट में 51 केस दर्ज किये गये हैं। इनमें कंपनी से एक हजार करोड़ रुपये मुआवजा मांगा गया है। कंपनी की साइड इफेक्ट की स्वीकृति के बाद केंद्र की मोदी सरकार को विपक्ष ने घेरना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि इसी कंपनी से इलेक्टोरेल बांड के रूप में भाजपा सरकार ने 52 करोड़ रुपया वसूला था। यदि भाजपा सरकार ने वैक्सीनेशन का श्रेय लिया है तो उसके दुष्परिणाम का श्रेय भी भाजपा को ही जाता है।
कोरोना काल का वह भयानक दौर आज भी दिल को हिलाने के लिये काफी है। यह वह वक्त था जब हर चौथे घर में मौत दरवाजा खटखटा रही थी। शमशान घाट में अंतिम संस्कार के लिये शवों की लाइन लगी हुई थी। ऐसे में कोविशील्ड कोवैक्सीन ही नजर आयी। कोविशील्ड भारतीय कंपनी सीरम इंस्ट्टीयूट द्वारा बनायी गयी थी।सीरम ने इस दवा का फार्मूला एस्ट्राजेनेका से लिया था। इस कंपनी के खिलाफ यूपी हाईकोर्ट में 51 केस चल रहे हैं। पीड़ितों ने एस्ट्राजेनेका से करीब 1 हजार करोड़ का हर्जाना मांगा है।
ब्रिटिश हाईकोर्ट में जमा किए गए दस्तावेजों में कंपनी ने माना है कि उनकी कोरोना वैक्सीन से कुछ मामलों में थ्रॉम्बोसिस थ्रॉम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम यानी TTS हो सकता है। इस बीमारी से शरीर में खून के थक्के जम जाते हैं और प्लेटलेट्स की संख्या गिर जाती है। अप्रैल 2021 में जेमी स्काट नामक शख्स की वेक्सीन के बाद हालात खराब हो गई थी। खून के थक्के जमने से उसे ब्रेम हैमरेज हो गया। स्काट की शिकायत पर मई 2023 में कंपनी ने दावा किया कि उसकी वैक्सीन से टीटीएस नहीं हो सकता है। लेकिन इसी साल फरवरी में हाईकोर्ट में जमा दस्तावेजों में कपनी अपने इस दावे से पलट गई। अब यह जानकारी सार्वजनिक हुई है। कंपनी ने अपने बचाव में यह भी कहा है कि इसी वैक्सीन से साठ लाख लोगों की जान बचाई गई है। खास बात यह है कि इस वैक्सीन का इस्तेमाल अब ब्रिटेन में नहीं हो रहा है। टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार में आने के कुछ माह बाद ही वैज्ञानिकों ने इस वैक्सीन के खतरे को भांप लिया था। तभी यह सुझाव दिया गया था कि 40 साल से कम उम्र के लोगों को दूसरी किसी वैक्सीन का भी डोज दिया जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन से होने वाले नुकसान कोरोना के खतरे से ज्यादा थे।
मेडिसिन हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी (MHRA) के मुताबिक ब्रिटेन में 81 मामले ऐसे हैं, जिनमें इस बात की आशंका है कि वैक्सीन की वजह से खून के थक्के जमने से लोगों की मौत हो गई। MHRA के मुताबिक, साइड इफेक्ट से जूझने वाले हर 5 में से एक व्यक्ति की मौत हुई है।
उधर,हिंदुस्तान में भी युवाओं में एकाएक ही हार्ट अटैक से मौत के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बात को स्वीकार किया कि कोरोना के बाद हार्ट की मश्शल कमजोर पड़ी हैं और इस कारण ही हार्ट अटैक के मामले सामने आ रहे हैं। दो दिन पहले ही मेरठ के अहमदनगर में रिमशा नामक युवती डांस करते करते गिर गयी और उसकी हार्ट अटैक से मौत हो गयी।
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