गजब-बिना भवन चल रहे बीएड कालेजों को समाज कल्याण विभाग ने दिये करोड़ो
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गजब-बिना भवन चल रहे बीएड कालेजों को समाज कल्याण विभाग ने दिये करोड़ो

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  • न भवन न भूमि फिर भी चल रहा बीएड कालेज
  • दिये गये पते पर दुकाने व पांच परिवार रह रहे
  • करोड़ो देने के बावजूद समाज कल्याण पर रेकार्ड नहीं
  • समाज कल्याण विभाग ने दस वर्ष से अधिक का दिया हवाला
  • अब विभाग कालेज से मांग रहा है पैसे का हिसाब किताब 
  • जांच रिपोर्ट पं. सुजान सिंह डिग्री कालेज व रामा कालेज के खिलाफ
  • जो भवन एक वर्ष में बनाना था, दो दशक बाद भी नहीं बना
  • कॉलेजों में विवि से अनुमोदित प्राचार्य, शिक्षक भी नहीं
  • जांच कमेटी ने कॉलेजों को बताया भूमिहीन 
रंग लगे न फिटकरी, रंग चौखा ही आये । यह कहावत किताबों और कहानियों में थी लेकिन इसे मेरठ की जमी पर उतार दिया है पंडित सुजान सिंह डिग्री कालेज व रामा कालेज आफ एजुकेशन अब्दुल्लापुर ने। इन दोनों ही कालेजों के पास न भूमि है, न ही भवन और न ही विश्वविद्यालय से अनुमोदित प्राचार्य व शिक्षक, मैनेजिंग कमेटी भी नहीं है लेकिन बीएड कॉलेज धडल्ले से हवा में दौड़ रहा है। सोने पर सुहागा यह कि जिला समाज कल्याण विभाग ने छात्रवृत्ति के रूप में करोड़ों रुपया संबंधित लोगों के पेट में उतार दिया है।..कितना..यह अपराध शाखा के जांच अधिकारी ने जानना चाहा तो जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनील कुमार सिंह का बेहद चौकाने वाला जवाब मिला। सुनील कुमार ने कहा कि 2009 से 2012 तक का रेकार्ड दस वर्ष से अधिक होने के कारण उनके पास उपलब्ध नहीं हैं। हां, दोनों ही कॉलेज से इसका रेकार्ड मांगा जा रहा है।

गंभीर सवाल उठता है कि जब देने वाले समाज कल्याण विभाग को नहीं पता कि उसने कितने करोड़ रुपये दिये हैं तो लेने वाला इसका हिसाब क्यों देगा,,वह भी तब जबकि वह इससे वाकिफ है कि जिस जगह पर कॉलेजों को संबद्धता मिली है, वहां कालेज जैसा कुछ नहीं हैं। वहां पांच परिवार वर्षों से रहते चले आ रहे हैं। यहां कालेज का कोई अस्तित्व ही नहीं हैं।  एक सवाल के जवाब में डिप्टी रजिस्ट्रार सोसाटीज ने जानकारी दी है कि पंडित सुजान सिंह कालेज की  2008 से 2021 तक बैलेंस शीट पत्रावली पर उपलब्ध नहीं हैं। इतना ही नहीं, 2008 से अब तक पंडित सुजान सिंह कालेज का आडिट नहीं हुआ। न ही आयकर ही जमा किया गया। जबकि 2003 से 2023 तक लगातार यह कालेज बिना मानक पूरे किये लगातार बीएड की सीट पाता, भरता और करोड़ों बटोरता आ रहा है।

दरअसल, इस बात का खुलासा तब हुआ जब इसकी शिकायत कहीं सुनवाई न होने पर सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से की गई। वहां से यूपी सरकार होते हुए जांच का जिम्मा चौ.चरण सिंह विश्वविद्यालय के साथ ही अन्य संबंधित विभागों के पास आ गया। विश्वविद्यालय ने दोनों कालेजों के लिये एक जांच गठित कर दी। इस तीन सदस्यीय जांच कमेटी जिसमें प्रो.शिवराज  सिंह, डा.मीनाक्षी शर्मा और प्रो हरिभाऊ गोपीनाथ खंडेकर शामिल थे अपनी जांच आख्या में स्पष्ट कहा कि समिति ने दिसंबर 2023 को संस्थानों का अलग अलग स्थलीय निरीक्षण किया तो पता चला कि इन कालेजों को बीएड पाठ्यक्रम में संबद्धता की स्वीकृति राज्यपाल सचिवालय द्वारा दी गई है। जांच समिति ने दोनों कालेजों के पास भूमि व भवन होना नहीं पाया। जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि जिस स्थल 103 आर्यनगर सूरजकुंड पर संस्थान को बीएड विद्यालय की अनुमति..संबद्धता की गई है उस पर दो मंजिला भवन निर्मित है, जिसमें पांच परिवार और संस्था अध्यक्ष स्वयं निवास करती हैं। यह भूमि स्व मदन मोहन शर्मा के स्वामित्व में राजस्व अभिलेखों में अंकित है,इसी भवन के मुख्य मार्ग पर कई दुकाने बनी हुई हैं, इनका व्यावसायिक प्रयोग किया जा रहा है।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक संस्थान के पास नियमानुसार विश्वविद्यालय से अनुमोदित प्राचार्य व शिक्षक नहीं हैं। यद्यपि बीएड पाठ्यक्रम में काउंसलिंग के माध्यम से छात्रों के प्रवेश कराये जा रहे हैं। जांच कर्ताओं का यह भी कहना है कि संस्थान जिस भूमि पर स्थित है वह भूमि या तो राजस्व अभिलेखों में संस्थान के नाम दर्ज होना अनिवार्य है अथवा संस्थान को संचालित करने वाली सोसाइटी..ट्रस्ट के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो अथवा पैतृक संस्था द्वारा संबंधित संस्थान के नाम,न्यूनतम तीस वर्ष के लिये पंजीकृत लीज डीड हो जो नहीं हैं।
(विस्तार से देखिये 👉 https://youtu.be/cnsHfl0x1q4 )
दरअसल, संस्थान के प्रबंधक ने संबद्धता के समय शपथ पत्र देते हुए एक वर्ष में संस्थान का भवन मानक अनुसार निर्मित करने की बात कही थी लेकिन दो दशक  बाद भी ऐसा नहीं किया गया। जांच कमेटी ने पंडित सुजान सिंह डिग्री कालेज की बीएड पाठ्यक्रम हेतु प्रदत संबद्धता निरस्त करने व छात्रों के हितों को देखते हुए संस्थान में छात्रों के प्रवेश पर रोक लगाने और प्रवेश प्राप्त छात्रों को किसी अन्य महाविद्यालय में स्थानांतरित करने की सिफारिश की है। इसके साथ ही संस्था अध्यक्ष विमला रानी द्वारा की गई वित्तीय शिकायतों पर संबंधित के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कराने की बात कही गई है। जांच कमेटी ने दिसंबर 2023 को रामा कॉलेज ऑफ एजुकेशन का भी स्थलीय निरीक्षण किया। यह कालेज भी पं.सुजान सिंह डिग्री कालेज की कापी पाया गया। रामा कॉलेज ऑफ एजुकेशन को जांच समिति ने भूमिहीन  की संज्ञा देते हुए इसकी संबद्धता भी समाप्त करने की सिफारिश की है।
इस जांच रिपोर्ट को आधार  बनाते हुए 9 जुलाई 2024 को विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने पंडित सुजान सिंह कॉलेज व रामा कालेज के सचिव प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।  इन नोटिस का जवाब 20 जुलाई 2024 तक समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाना था। इस दौरान दोनों कालेज  हवा में  बीएड की सौ से 200 सीट प्रति वर्ष  पाते, भरते और पैसा कमाते रहे हैं। इस धनराशि में छात्रों से ऊपर से लिया जाने वाला पैसा शामिल नहीं है। चौ.चरण सिंह विश्वविद्यालय द्वारा दिये गये कारण बताओ नोटिस का जवाब देने की बजाय संबंधित लोगों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया। हाईकोर्ट ने इसे खारिज करते हुए आदेश दिये कि वह अपना पक्ष विश्वविद्यालय के समक्ष रखे,इसके साथ ही चौ.चरण सिंह विश्वविद्यालय एक माह के भीतर इस केस का निस्तारण कर दे। यह आदेश 22 अक्टूबर 2024 को दिया गया था। यानी इसका निस्तारण 22 दिसंबर 2024 तक अनिवार्य रूप से करना था। यह बात और है कि विश्वविद्यालय सात माह से न सिर्फ लंबित रखे हुए है बल्कि उसे सभी आरोप, जांच रिपोर्ट में दोषी पाने, संबद्धता निरस्त करने की संस्तुति को दरकिनार कर लाभ देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इतना सब तब है जबकि तीन फरवरी 2025 को जारी एक पत्र में सहायक कुलसचिव ने जानकारी दी कि प्रकरण के संबंध में विश्वविद्यालय द्वारा एक समिति का गठन किया था। समिति की जांच आख्या  के आलोक में दोनों संस्थानों को शैक्षिक सत्र 2024 व 25 में छात्रों के प्रवेश अनुमन्य नहीं किये गये हैं।
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