4 महीने बाद भी नहीं मिले प्लॉट और मुआवजा: मेरठ विकास प्राधिकरण के बाहर किसानों ने खोला मोर्चा
मेरठ: मेरठ की वेदव्यासपुरी आवासीय योजना से प्रभावित किसानों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जिला प्रशासन के खिलाफ एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। स्थानीय पार्षद प्रशांत कसाना के नेतृत्व में समस्त प्रभावित किसानों ने मेरठ के जिलाधिकारी (DM) को एक ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं के शीघ्र समाधान की गुहार लगाई है। किसानों का कहना है कि बीते 29 मई 2026 को माननीय मंत्री जी और मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) के उपाध्यक्ष द्वारा मौके पर पहुंचकर उन्हें आश्वासन दिया गया था कि डेढ़ महीने के भीतर उनकी सभी समस्याओं का निस्तारण कर दिया जाएगा।
समझौते के तहत किसानों को उनका उचित प्रतिकर और प्लॉट उपलब्ध कराए जाने थे, लेकिन करीब चार महीने बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।सौंपे गए इस मांग पत्र में मुख्य रूप से चार बिंदु उठाए गए हैं, जिनमें समझौते के अनुसार किसानों को तत्काल प्रतिकर व प्लॉट दिलाना, गांव के लाल डोरे से संबंधित समस्याओं का निस्तारण करना, किसानों की आबादी व आबादी के प्लॉटों से जुड़ी अड़चनों को दूर करना और योजना से प्रभावित अन्य सभी लंबित मामलों का समयबद्ध समाधान शामिल है।
किसानों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि यदि इस पत्र की प्राप्ति के एक सप्ताह के भीतर उनकी उपरोक्त समस्याओं पर ठोस और लिखित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे लोकतांत्रिक व शांतिपूर्ण तरीके से बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। इसके तहत वेदव्यासपुरी स्थित ‘मेरठ मंडपम’ के कार्य और योजना के अन्य सभी निर्माण कार्यों को पूरी तरह रोकने का निर्णय लिया जा सकता है, जिसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और शासन-प्रशासन की होगी।

