सेंट्रल मार्केट प्रकरण-“विश्वास की तेरहवीं” की गूंज लखनऊ तक पहुंची,दौड़े अफसर
- शास्त्रीनगर की महिलाओं का अनोखा विरोध
- सेंट्रल मार्केट प्रकरण-विश्वास की तेरहवीं !!
- झोली भर वोट लिया लेकिन साथ नहीं दिया
- ध्वस्तीकरण हुआ, 44 दुकानें सील हुई
- राम के नाम पर वोट लेने वाले लेकिन नहीं आये
- भाजपा के नुमाइंदों से टूटा विश्वास
- सुबह हवन,दोपहर को ब्रह्मभोज और शाम को शोक सभा
- 12 दिन के इंतजार के बाद आज की विश्वास की तेरहवीं
- कैलाश डेरी का नाम सील होने वाली लिस्ट से आउट होना चर्चा में आया
- चंदाखोरों के नाम सार्वजनिक करने की मांग ने जोर पकड़ा
इस बीच, महिलाओं के इस अनोखे विरोध की गूंज लखनऊ तक जा पहुंची। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बेहद करीबी व राजनीतिक सलाहाकार अवनीश अवस्थी ने मेरठ पहुंचकर वस्तुस्थिति को बेहद करीब व गंभीरता से समझने की कोशिश की। उनके साथ आवास विकास के प्रमुख सचिव पी गुरुप्रसाद और आवास आयुक्त डॉ बलकार सिंह भी थे। मेरठ के पूर्व में जिलाधिकारी रह चुके अवनीश अवस्थी का मेरठ आना और वस्तु स्थिति को समझना यह दर्शाने के लिये काफी है कि अब शासन दुर्लभ आय वर्ग के वाशिंदों की परेशानी को बेहद शिद्दत से ले रहा है। यह भी स्पष्ट हो गया है कि यह मुद्दा केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में बड़े शोरूम आदि का नहीं है बल्कि इससे दुर्लभ आय वर्ग के लोग भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
व्यापारियों का प्रतिनिधित्व कर रहे सतीश गर्ग ने अवनीश अवस्थी को बताया कि आवास विकास परिषद ने 1982 में सेटबैक छोड़ने के जो नियम बनाये थे उनमें 38 मीटर के मकानों को सेटबैक नियम से मुक्त रखा गया था। इसके अलावा बीच में एक महीन दीवार के साथ आगे पीछे मिलाकर चार मकान बनाये गये थे। अब सेटबैक का जो नियम लागू किया जा रहा है यदि इन मकानों पर भी इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में लागू किया गया तो ये सभी मकान जमीदोज हो जायेंगे। इस पर अवनीश अवस्थी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन को शत प्रतिशत तरीके से करना होगा लेकिन दुर्लभ आय वर्ग के लोगों की इस जटिलता को मजबूती के साथ सुप्रीम कोर्ट में रखा जायेगा। मंडल आयुक्त कार्यालय में लगभग ढाई घंटे चली इस विशेष बैठक में मंडलायुक्त, जिले के डीएम, एसएसपी, मेडा के वीसी, नगर आयुक्त औरप्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
उधर, बीते दिवस की गई घोषणा के अनुपालन में आज सुबह महिलाओं ने सेक्टर दो स्थित धरना स्थल पर हवन किया। हवन के बाद ब्रह्मभोज व शाम को शोक सभा का आयोजन किया जाना प्रस्तावित किया गया था। इस बीच, आज सुबह ही भारी पुलिस की मौजूदगी होने से सभी आशंकित हो गये। धरनारत महिलाओं का नेतृत्व कर रही कुछ महिलाओं को एक बंद कक्ष में लेकर दो महिला पुलिस क्षेत्राधिकारियों ने वार्ता की। इस वार्ता का असर यह हुआ कि ब्रह्मभोज व शोकसभा निरस्त कर दी गई। तब तक “विश्वास की तेहरवीं” के रूप में हवन हो चुका था। धरने पर बैठी महिलाों को पुलिस द्वारा यह भी समझाने का प्रयास किया गया कि शांतिपूर्वक चल रहे इस धरने के दौरान यदि बाहरी व्यक्ति द्वारा कोई गैर वाजिश हरकत कर दी गई तो उसकी जिम्मेदारी और जवाबदेही से कोई बच नहीं पायेगा। हालांकि महिलाओं ने यही बताया कि उनका आंदोलन बेहद शांतिपूर्वक चल रहा है, उनका किसी को भी परेशानी में डालने का कोई इरादा नहीं हैं, वे सिर्फ अपनी छत न छिनने की लड़ाई लड़ रही हैं।
इस बीच, कैलाश डेरी का सील होने वाली दुकानों की सूची से नाम बाहर होना भी शास्त्रीनगर में चर्चा का विषय बना हुआ है। कैलाश डेरी का प्रथम तल भी जहां कमर्शियल गतिविधि में शामिल हैं वहीं यहां अवैध रूप से बेसमेंट भी बना लिया गया है। दरअसल, 661/6 के अनाधिकृत व्यवसायिक काम्पलेक्स के ध्वस्तीकरण के बाद 56 ऐसे ही भवनों की सूची आवास एवं विकास परिषद द्वारा बनाई गई थी। इन सभी पर परिषद को सील लगानी थी। 44 को सील कर दिया गया लेकिन रहस्यमय हालात में 12 भवनों को इस सूची से आउट कर दिया गया। इनमें कैलाश डेरी भी शामिल रही। दुर्लभ आय वर्ग के लोगों की छत भी छीनी जा रही है और कैलाश डेरी को छोड़ दिया जाना लोगों को हजम नहीं हो रहा है।
सेंट्रल मार्केट प्रकरण का एक दिलचस्प पहलू यह भी निकलकर सामने आ रहा है कि इस मद में करीब 14 लाख रुपया चंदा एकत्रित किया गया है। इस आंदोलन को लेकर बने व्हाट्स एप ग्रुप में भी इस पर काफी चर्चा इन दिनों चल रही है। बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने इस चंदे को ठिकाने लगा दिया है और अब इसका हिसाब भी नहीं दे रहे हैं। कुछ लोग इन “सफेदपोश” लोगों के नाम सार्वजनिक करने की मांग भी इन ग्रुप्स में कर रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि सेंट्रल मार्केट में जो नुकसान हुआ है,उसकी भरपाई इन लोगों के घर, गाड़ी आदि बेचकर की जानी चाहिये।
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