1975 में देश में लगाए गए आपातकाल को असंवैधानिक घोषित किए जाने की मांग के मामले में 94 साल की महिमा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सरकार को नोटिस जारी किया गया है. लेकिन इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में 18 दिसंबर तक सुधार करने को कहा है. याचिकाकर्ता के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि इस मामले की संविधान पीठ में सुनवाई की जानी चाहिए. साल्वे ने कहा कि ये महत्वपूर्ण मामला है. हम शाह आयोग की रिपोर्ट पर भरोसा करते हुए कहते हैं कि आपातकाल की घोषणा सत्ता और संवैधानिक अधिकारों का दुरुपयोग था. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि इस मामले के अन्य पहलुओं के अलावा उचित संदर्भ में यह देखना भी महत्वपूर्ण है कि अगर इस तरह की स्थिति हर बार उठती है तो क्या अदालत इसे सुन सकती है और आदेश जारी कर सकती है? यानी मूल घटना के साथ ये देखना होगा कि 45 साल बाद ऐसा किया जा सकता है या नहीं?सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय किशन कौल ने टिप्पणी की कि इस मुद्दे को उठाने में 45 साल लग गए..? इस पर साल्वे ने कहा कि यह मुद्दा बहु दूरगामी है. 1975 में आपातकाल के नाम पर 19 महीने तक सत्ता का खुल कर दुरुपयोग होता रहा. याचिकाकर्ता 94 साल की वीरा सरीन ने कोर्ट को बताया था कि 1975 में आपातकाल के नाम पर उनके पति को कैसे प्रताड़ित किया गया था ।।
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