- एनपीपीए ने होलसेल प्राइस में किए बदलाव
- इसेंशियल लिस्ट की दवाएं भी होंगी महंगी
प्रत्यक्ष रूप से पेट्रोल डीजल के दामों में पिछले छह दिन में पांच बार एजाफा हो चुका है जबकि एलपीजी के रेट में पचास रूपये की सीधी वृद्दि हुई है। कीमतों में वृद्धि से आम लोगों को रोजाना झटके पर झटके लग रहे हैं। अब महंगाई का नया झटका जरूरी दवाओं की कीमत देने जा रही है। एक अप्रैल से भारत की ड्रग प्राइसिंग अथॉरिटी ने शेड्यूल दवाओं के लिए कीमतों में 10.7 फीसदी की बढ़ोतरी करने की अनुमति दे दी है, जिसके बाद अब पैरासिटामॉल समेत 800 से ज्यादा दवाओं के दाम बढ़ जाएंगे।
नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को कैलेंडर ईयर 2021 के होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) में 2020 की इस अवधि की तुलना में 10.7 पर्सेंट बदलाव की घोषणा की है। यानी अधिकांश सामान्य बीमारियों के इलाज में उपयोग की जाने वाली जरूरी दवाओं की कीमतों में 1 अप्रैल से 10.7 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। इस लिस्ट में करीब 800 दवाएं हैं। इनमें बुखार, इन्फेक्शन, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, त्वचा रोग और एनीमिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं. इसके अलावा पैरासिटामॉल, फेनोबार्बिटोन, फ़िनाइटोइन सोडियम, एज़िथ्रोमाइसिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन हाइड्रोक्लोराइड और मेट्रोनिडाज़ोल जैसी दवाएं शामिल हैं।
सबसे अहम बात ये है कि इस महंगाई की चपेट में वो दवाएं भी आएंगी जो नेशनल इसेंशियल लिस्ट ऑफ मेडिसिन (एनईएलएम) में शामिल हैं। इस लिस्ट में एंटीबायोटिक्स, एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स, कान-नाक और गले की दवाएं, एंटीसेप्टिक्स, पेन किलर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल मेडिसिन और एंटीफंगल दवाएं शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इनमें भी काफी बढ़ोतरी हो सकती है। ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर 2013 के क्लॉज 16 एनपीपीए को प्रत्येक वर्ष के 1 अप्रैल को या उससे पहले पूर्ववर्ती कैलेंडर वर्ष के लिए एनुअल होलसेल प्राइस इंडेक्स (डब्ल्यूपीआई) के अनुसार अनुसूचित फॉर्मूलेशन की अधिकतम कीमत को संशोधित करने की अनुमति देता है। इसी आधार पर हर साल 1 अप्रैल से नई कीमतें लागू होती हैं।