डा. सरोजनी अग्रवाल के एनसीआर मेडिकल कालेज पर अब ईडी का छापा
- सपा सरकार में एमएलसी रही हैं डा.सरोजनी अग्रवाल
- सत्ता बदली तो मेडिकल कालेज का नाम व पार्टी भी बदल ली
- सीटे बढ़ाने के लिये मोटे लेनदेन के सबूत लगे हैं सीबीआई के हाथ
- 35 आरोपियों में डा.शिवानी अग्रवाल भी हैं शामिल
- डा. शिवानी अग्रवाल पर लटकी है गिरफ्तारी की तलवार
- हर बार की तरह इस बार भी संकट को टाल जायेंगी डा.सरोजनी ?
सपा सरकार की एमएलसी व मौजूदा भाजपा नेता डा.सरोजनी अग्रवाल व उनके परिवार की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही हैं। सीबीआई के बाद आज वृहस्पतिवार को परिवार के एनसीआर मेडिकल कालेज पर ईडी ने छापेमारी की। छापेमारी के दौरान किसी को भी भीतर अथवा बाहर नहीं जाने दिया गया। ईडी की टीम ने कालेज की असिस्टेंट मैनेजिंग डायरेक्टर व पूर्व एमएलसी डा. सरोजिनी अग्रवाल की बेटी डा. शिवानी अग्रवाल से लेन-देन से जुड़े सबूत जुटाए व स्टाफ से भी बातचीत की। उससे पहले टीम ने रिकार्ड रूम की तलाशी ली। कई अहम दस्तावेज,डिजिटल रिकार्ड कब्जे में लिए हैं। सूत्रों का यह भी दावा है कि डा. शिवानी पर गिरफ्तारी की तलवार भी लटकी हुई है।
सूत्रों के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के अधिकारियों द्वारा रिश्वत लेने और गोपनीय जानकारी लीक करने के आरोपों की चल रही जांच को लेकर हापुड़ रोड स्थित एनसीआर मेडिकल कालेज एंड रिसर्च सेंटर पर छापा मारा है।

गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे ईडी की टीम एनसीआर मेडिकल कालेज पहुंची थी। ईडी की यह कार्रवाई सीबीआई के एसएसपी कमल सिंह चौधरी द्वारा 30 जून को नई दिल्ली में दर्ज कराई गई 225 एफआईआर के सिलसिले में नामजद 35 आरोपित के ठिकानों पर की गई हैं। इन्हीं आरोपितों में से एक इस कालेज की असिस्टेंट मैनेजिंग डायरेक्टर डा. शिवानी अग्रवाल है।

दरअसल, देश के अधिकांश मेडिकल कालेजों में सीटे बढ़ाने के इस खेल के उजागर होने के बाद सीबीआई और अब ईडी सक्रिय हुई है। इस कड़ी में सीबीआई को एनसीआर मेडिकल कालेज में 50 सीट बढ़ाने का आवेदन करने के बाद उदयपुर (राजस्थान) स्थित गीतांजलि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार मयूर रावल और दिल्ली की एमएस टेक्निफाई साल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के प्रोजेक्ट हेड आर रणदीप नायर में बातचीत का सबूत डा. शिवानी अग्रवाल के मोबाइल में मिला है। मयूर रावल ने रायपुर (छत्तीसगढ़) के श्री रावतपुरा मेडिकल कालेज को निरीक्षण की तिथि बताई थी।
डा. शिवानी ने निरीक्षण की तिथि बताकर स्टाफ और डाक्टरों को छुट्टी से वापस बुलाया था। हालांकि यह निरीक्षण औचक व गोपनीय होता है लेकिन बताया गया है कि इसकी पूर्व सूचना डा.शिवानी अग्रवाल दे दी गई थी और इसकी तैयारी के चलते ही स्टाफ को बुला लिया गया था।

ईडी टीम ने सीबीआइ के इन्हीं प्रमाण को लेकर डा शिवानी अग्रवाल से पूछताछ की। टीम ने एक जुलाई को डा. शिवानी के आफिस व घर पर मारे गए सीबीआई के दौरान मिले डिजीटल रिकार्ड के बारे में भी बातचीत की। ज्ञात हो कि सीबीआई की इस कार्रवाई के चलते एनएमसी ने एनसीआर मेडिकल कालेज समेत छह मेडिकल कालेजों में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जीरो ईयर घोषित कर दिया था। बाद मे हाईकोर्ट दिल्ली ने एनसीआर मेडिकल कालेज के मामले में एनएमसी के आदेश पर रोक लगा दी।
बता दें कि कॉलेज की सहायक प्रबंध निदेशक डॉ. शिवानी अग्रवाल पर रिश्वत, फर्जी दस्तावेज और फर्जी फैकल्टी दिखाकर 50 सीटें बढ़वाने की कोशिश करने का आरोप है। शिवानी पूर्व एमएलसी डॉ. सरोजिनी अग्रवाल की बेटी हैं। सीबीआई ने इस मामले में डॉ. शिवानी समेत 35 नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
खरखौदा स्थित एनसीआर मेडिकल कॉलेज ने एमबीबीएस की सीटें 150 से बढ़ाकर 200 कराने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) में आवेदन किया था। सीबीआई के अनुसार निरीक्षण के दौरान फर्जी फैकल्टी तैनात दिखाई गई, बायोमेट्रिक में हेराफेरी कर उपस्थिति दर्ज कराई गई और काल्पनिक मरीजों का इलाज दर्शाकर फर्जी दस्तावेज पेश किए गए। आरोप है कि मान्यता रिपोर्ट को अनुकूल बनाने के लिए एनएमसी की टीम को रिश्वत की पेशकश भी की गई।
जहां तक बात डा. सरोजनी अग्रवाल के परिवार की है तो उनकी बड़ी बेटी डा. हिमानी महिला आयोग की मौजूदा सदस्य है। डा. सरोजनी अग्रवाल ने लंबे समय तक समाजवादी पार्टी की राजनीति की और कई बार की एमएलसी भी रही लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद उन्होंने भी भाजपा का दामन थाम लिया। आजम खान के बेहद करीबी रही डा. सरोजनी अग्रवाल आजम खान के हश्र से चिंतित थी और इसी वजह से उन्होंने न केवल इस मेडिकल कालेज का नाम बदला बल्कि भाजपा का दामन भी थाम लिया। शुरूआत में एनसीआर मेडिकल कालेज का नाम मुलायम सिंह यादव मेडिकल कालेज था, जो बाद सत्ता परिवर्तन के बाद परिवर्तित कर दिया गया।
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